भारत की 10 सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियाँ
भारत में राजनीति का इतिहास बेहद पुराना और रोचक रहा है। आज देश में सैकड़ों राजनीतिक पार्टियाँ हैं, लेकिन कुछ ऐसी हैं जो दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं या रही हैं। आइए जानते हैं भारत की उन 10 प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बारे में ।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885)
कांग्रेस भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना 1885 में ए. ओ. ह्यूम, दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी जैसे नेताओं ने की थी। कांग्रेस ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई प्रधानमंत्रियों को देश को नेतृत्व देने का मौका मिला। एक समय था जब कांग्रेस पूरे देश में सबसे मजबूत पार्टी थी। हालांकि आज के समय में कांग्रेस काफी कमजोर स्थिति में है, लेकिन पार्टी अपने पुराने जनाधार को वापस पाने की कोशिश में लगातार लगी हुई है।
शिरोमणि अकाली
दल (1920)
शिरोमणि अकाली दल
(Shiromani Akali Dal) की स्थापना 1920 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में हुई थी। यह पार्टी मुख्य रूप से सिख समुदाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए बनी थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य गुरुद्वारों पर नियंत्रण पाना और सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना था। धीरे-धीरे यह एक राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी और पंजाब की राजनीति में एक प्रमुख ताकत बनी रही।
अकाली दल ने लंबे समय तक बीजेपी के साथ गठबंधन में काम किया और कई बार पंजाब में सरकार भी बनाई। हालांकि हाल के वर्षों में इस गठबंधन में दरार आई और पार्टी ने अलग रास्ता अपना लिया। आज भी शिरोमणि अकाली दल सक्रिय है, लेकिन कई आंतरिक विभाजनों और नए गुटों के कारण इसकी ताकत पहले जैसी नहीं रही।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (1925)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना 1925 में हुई थी और यह भारत की सबसे पुरानी वामपंथी पार्टियों में से एक है। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य समाजवाद और श्रमिकों, किसानों के अधिकारों की रक्षा करना रहा है। आजादी के पहले और बाद में CPI ने कई जन आंदोलनों और मजदूर आंदोलनों का नेतृत्व किया। हालांकि समय के साथ इसकी ताकत कमजोर हुई और पार्टी का विभाजन भी हुआ, जिससे CPI(M) जैसी दूसरी पार्टी बनी। आज भी CPI सक्रिय है, लेकिन उसकी उपस्थिति कुछ राज्यों तक सीमित रह गई है।
द्रविड़ मुनेत्र
कड़गम (1949)
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की स्थापना 1949 में सी. एन. अन्नादुरै ने की थी। यह पार्टी द्रविड़ आंदोलन से निकली, जिसका उद्देश्य तमिल भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा करना था। DMK ने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों के अधिकार, और हिंदी के विरुद्ध आंदोलन जैसे मुद्दों पर ज़ोर दिया और तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मज़बूत पकड़ बनाई।
DMK पहली द्रविड़ पार्टी थी जिसने 1967 में कांग्रेस को हराकर तमिलनाडु में सत्ता हासिल की। इसके बाद पार्टी ने कई बार राज्य में सरकार बनाई। वर्तमान में भी DMK तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी है और एम. के. स्टालिन इसके प्रमुख नेता हैं। पार्टी आज भी सामाजिक समानता और क्षेत्रीय अधिकारों की पक्षधर मानी जाती है और दक्षिण भारत की सबसे प्रभावशाली पार्टियों में से एक है।
शिवसेना
(1966)
शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को बाल ठाकरे ने की थी। यह पार्टी मूल रूप से महाराष्ट्र में मराठियो के हक़ और सम्मान के लिए बनाई गई थी। शुरुआती दौर में शिवसेना ने क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और मराठी लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता जैसे मुद्दों पर ज़ोर दिया।
समय के साथ शिवसेना महाराष्ट्र की एक प्रभावशाली पार्टी बन गई और कई बार राज्य सरकार का हिस्सा रही। पार्टी लंबे समय तक भाजपा की सहयोगी रही, लेकिन 2019 में मतभेद के चलते गठबंधन टूट गया। इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई।
2022 में पार्टी में आंतरिक विभाजन हुआ, जिससे एक बड़ा हिस्सा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग हो गया और BJP के साथ मिलकर नई सरकार बनाई। अब शिवसेना दो गुटों में बंटी हुई है — एकनाथ शिंदे गुट (जो अब आधिकारिक रूप से "शिवसेना" नाम और चुनाव चिन्ह रखता है) और उद्धव ठाकरे गुट, जिसे "शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)" कहा जाता है। दोनों ही गुट अभी भी सक्रिय हैं।
ऑल इंडिया
अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (1972)
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) की स्थापना 17 अक्टूबर 1972 को एम. जी. रामचंद्रन (M.G.
Ramachandran) ने की थी। यह पार्टी DMK से अलग होकर बनी थी, जब MGR ने करुणानिधि पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए DMK से नाता तोड़ा।
AIADMK की विचारधारा द्रविड़ राजनीति, तमिल अस्मिता और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित रही है। यह तमिलनाडु की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में से एक है और लंबे समय तक राज्य की सत्ता में भी रही है।
MGR के बाद जयललिता इस पार्टी की सबसे लोकप्रिय नेता बनीं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई बार विधानसभा चुनाव जीते और सत्ता चलाई। जयललिता के निधन (2016) के बाद पार्टी में कई गुट बने और आंतरिक संघर्ष भी सामने आए।
वर्तमान में AIADMK अभी भी सक्रिय है, लेकिन जयललिता के बाद उसकी पकड़ थोड़ी कमजोर हुई है। फिर भी यह तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और DMK की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है।
भारतीय जनता
पार्टी (1980)
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। यह पार्टी पहले की भारतीय जनसंघ का ही एक नया रूप है, जिसे जनसंघ के नेताओं ने जनता पार्टी से अलग होने के बाद बनाया था। पार्टी के प्रमुख संस्थापक नेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, और भैरों सिंह शेखावत जैसे नाम शामिल हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार केंद्र में सरकार बनाई। इसके बाद 2014, 2019 और 2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज की और केंद्र में एक मजबूत सरकार बनाई।
Comments
Post a Comment